यदि आप कुछ समय के लिए पर्स पीछे वाली जेब में रखते हैं तो इससे आपको कोई समस्या नहीं होती है. लेकिन यदि वह पूरा दिन आपकी पिछली जेब में रहता है तो आपको सोचने की जरूरत है. क्योंकि पीछे वाली जेब में पर्स रखने से रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो सकती है. साथ ही कमर के निचले भाग में दर्द भी हो सकता है.
मेंसहेल्थ में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार यूनिवर्सिटी ऑफ वॉटरलू के प्रोफ़ेसर स्टुअर्ट मैकगिल ने बताया कि पर्स कुछ देर ही रखने के लिए होता है. लेकिन यदि आप बिल, कार्ड और सिक्कों के गट्ठर पर देर तक बैठेंगे तो इससे आपके कमर के निचले भाग में दर्द होने लगेगा.
पिछली जेब में अधिक मोटा पर्स रखने के कारण कूल्हा एक तरफ झुका हुआ रहता है. जिससे रीढ़ की हड्डी पर अधिक दबाव पड़ता है. पर्स जितना अधिक मोटा होगा शरीर उतना ही अधिक दर्द करेगा.
इससे बचने के लिए आप पैसे रखने वाली क्लिप या फिर पतले स्टाइलिश वॉलेट का प्रयोग कर सकते हैं. जो आसानी से आगे वाली जेब में रखा जाए.
ये जानकारी बीबीसी हिंदी से भी लिया गया है।
आपको यह पोस्ट कैसी लगी, कमेंट में जरूर बताएँ. पोस्ट पसंद आने पर लाइक और शेयर जरूर करे एवं एेसी ही पोस्ट लगातार पाने के लिए हमें फॉलो करना न भूले. आपका धन्यवाद.
![]() |
| Pixabay |
इस पोस्ट में हम जानेंगे, पिछली जेब में पर्स रखना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है. तो चलिए जानते हैं इसके बारे में.
मेंसहेल्थ में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार यूनिवर्सिटी ऑफ वॉटरलू के प्रोफ़ेसर स्टुअर्ट मैकगिल ने बताया कि पर्स कुछ देर ही रखने के लिए होता है. लेकिन यदि आप बिल, कार्ड और सिक्कों के गट्ठर पर देर तक बैठेंगे तो इससे आपके कमर के निचले भाग में दर्द होने लगेगा.
पिछली जेब में अधिक मोटा पर्स रखने के कारण कूल्हा एक तरफ झुका हुआ रहता है. जिससे रीढ़ की हड्डी पर अधिक दबाव पड़ता है. पर्स जितना अधिक मोटा होगा शरीर उतना ही अधिक दर्द करेगा.
इससे बचने के लिए आप पैसे रखने वाली क्लिप या फिर पतले स्टाइलिश वॉलेट का प्रयोग कर सकते हैं. जो आसानी से आगे वाली जेब में रखा जाए.
ये जानकारी बीबीसी हिंदी से भी लिया गया है।
आपको यह पोस्ट कैसी लगी, कमेंट में जरूर बताएँ. पोस्ट पसंद आने पर लाइक और शेयर जरूर करे एवं एेसी ही पोस्ट लगातार पाने के लिए हमें फॉलो करना न भूले. आपका धन्यवाद.

Comments
Post a Comment