टाइफाइड बुखार के कारण, लक्षण और बचाव

मलेरिया, चिकनगुनिया या डेंगू होने पर लैब टेस्ट से तुरंत इसके होने का पता चल जाता है. लेकिन टाइफाइड बुखार दूसरे बुखार से थोड़ा अलग होता है. इसमें ना तो तुरंत इसके लक्षण दिखते हैं और ना ही लैब टेस्ट से तुरंत इसका पता चलता है. टाइफाइड होने के 1 सप्ताह बाद ही लैब टेस्ट भी पॉजिटिव आती है. टाइफाइड एक ऐसा बुखार है जो ठीक होने के बाद भी फिर से आ सकता है और किसी को तो यह बुखार बार-बार आता है. इसलिए इसकी पूरी जानकारी होना सबके लिए बहुत जरूरी होता है. तो चलिए जानते हैं टाइफाइड बुखार के कारण, लक्षण और बचाव के उपाय के बारे में.
टाइफाइड बुखार के कारण, लक्षण और बचाव
टाइफाइड बुखार के कारण, लक्षण और बचाव

टाइफाइड के कारण

टाइफाइड साल्मोनेला टाइफी और साल्मोनेला पैराटाइफी नामक बैक्टीरिया से होता है. यह बैक्टीरिया हमारे खाने-पीने से हमारे शरीर में प्रवेश करता है. ये बैक्टीरिया हमारे इंटेस्टाइन में चिपक जाते हैं जिससे 10-15 दिनों के बाद हमें बुखार आना शुरू हो जाता है.

टाइफाइड के लक्षण

1. टाइफाइड के पहले सप्ताह में काफी तेज बुखार आता है, जो 103 से 104 डिग्री फारेनहाइट तक चला जाता है.

2. टाइफाइड बुखार के दौरान हाथ में दर्द होना, पेट में दर्द होना, तेज सर दर्द होना, भूख का न लगना और कब्ज या डायरिया भी हो सकता है.

3. टाइफाइड होने के 1 सप्ताह बाद पेट के ऊपर कई गुलाबी धब्बे दिखने लगते हैं. साथ ही पेट दर्द और खांसी भी हो सकता है.

4. टाइफाइड की वजह से उल्टी, दस्त, मल में खून आना और लीवर का बड़ा हो जाना आदि समस्याएं होती है.

5. दूसरे सप्ताह के अंत में टाइफाइड बुखार में और भी कई समस्या शुरू हो जाता है. इस दौरान मरीज का दिमागी हालात बदल जाता है. वह परेशान रहने लगता है और कुछ भी बोलता रहता है.

6. इसके अलावा लेबोरेटरी में ब्लड कल्चर, स्टूल कल्चर और विडाल टेस्ट के द्वारा भी टाइफाइड बुखार होने का पता लगा सकते हैं.

टाइफाइड बुखार के बचाव

1. साल्मोनेला के संक्रमण से बचने के लिए आप को अच्छी तरह से अपने हाथ धोना चाहिए. खाने से पहले तो अवश्य ही हाथ धोएं.

2. पानी जितना संभव हो साफ और उबालकर ही पिएँ. साथ ही हमेशा पूरी तरह से पका हुआ भोजन ही करें.

3. कच्चे फलों को खाने से पहले हमेशा उसे अच्छे तरह से धोकर साफ कर लेना चाहिए.

4. इससे बचाव के लिए आप को प्राय: हल्का खाना ही खाना चाहिए.

5. टाइफाइड में जो एंटीबायोटिक दवा चल रही होती है, उसे पूरा जरूर लेना चाहिए. टाइफाइड में एंटीबायोटिक थेरेपी थोड़े लंबे समय तक के लिए होती है. इसलिए इसे कभी बीच में अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए वरना आपको फिर से टाइफाइड हो सकता है.

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