गॉल ब्लेडर हमारे लीवर के ठीक पीछे दाएं तरफ मौजूद होता है जिसमें बाइल नाम का फ्लूइड जमा होता है. जिसे बाद में यह आँत में छोड़ देती है जिससे भोजन का पाचन होता है. अगर यह गॉल ब्लेडर ठीक से काम नहीं करता है तो यह क्रिस्टलाइजेशन होने लगता है. इसके क्रिस्टलाइजेशन होने के कारण यह अलग-अलग कई क्रिस्टलों का निर्माण करता है जो बाद में स्टोन में बदल जाता है.
1. Cholesterol Gallstone : यह कोलेस्ट्रोल के कारण होता है, जब इसमें 80% तक कोलेस्ट्रॉल जमा हो जाता है तो कोलेस्ट्रॉल गॉलस्टोन बन जाता है.
2. Pigment Gallstone : अगर गॉलब्लेडर में बिलीरुबिन पिगमेंट का स्टोरेज हो जाए तो गॉलब्लेडर स्टोन हो सकता है.
Liver की बीमारी या लीवर सिरोसिस होने पर गॉल स्टोन होने की संभावना हो सकती है.
अगर बोन मैरो ट्रांसप्लांट हुआ हो तो भी आपको इसका रिस्क हो सकता है.
डायबिटीज में भी इसके होने की संभावना रहती है.
यह अधिकतर 40 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को होता है.
अगर अचानक आपका वजन घट रहा हो तो गॉल स्टोन होने संभावना हो सकती है.
मोटापा में या फिर ज्यादा मात्रा में कोलेस्ट्रॉल के सेवन से भी इसके होने की संभावना रहती है.
चक्कर आना, बुखार आना, पेट में दर्द होना, एसिडिटी होना, उल्टियां होना एवं गॉल ब्लेडर में जलन महसूस होना इसके मुख्य लक्षण है.
1. अगर इसका इलाज नहीं कराया जाए तो मरीज को बार-बार दर्द उठ सकती है और जिसका स्टोन काफी बढ़ गया हो, फिर भी उसे नहीं निकाला जाय तो कैंसर भी हो सकती है. यहाँ तक कि गॉल ब्लेडर फट भी सकती है। जो बाद में ब्लड में फैल जाएगी और पैशेंट की स्थिति सीरियस हो जाएगी।
2. जिन्हें गॉल ब्लेडर स्टोन की समस्या है उन्हें ऑपरेशन के द्वारा गॉल ब्लेडर निकलवा लेना चाहिए। क्योंकि गॉल ब्लेडर में स्टोन तभी होता है, जब वो ठीक से काम न कर रहा हो यानि गॉल ब्लेडर खराब हो गया हो। इसलिए इसमें सिर्फ स्टोन ही नहीं बल्कि गॉल ब्लेडर भी निकाल दिया जाता है।
3. गॉल ब्लेडर होने के बाद भी वहाँ एक कॉमन बाइल डक्ट मौजूद होता है जो ब्लेडर के फंक्शन को कंट्रोल कर लेती है। इसलिए गॉल ब्लेडर निकालने पर भी इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है।
Image source : yashodahospitals.com
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| गॉल ब्लेडर में स्टोन कैसे होता है जानिए इसका समाधान |
यह अक्सर दो तरह के होते हैं.
1. Cholesterol Gallstone : यह कोलेस्ट्रोल के कारण होता है, जब इसमें 80% तक कोलेस्ट्रॉल जमा हो जाता है तो कोलेस्ट्रॉल गॉलस्टोन बन जाता है.
2. Pigment Gallstone : अगर गॉलब्लेडर में बिलीरुबिन पिगमेंट का स्टोरेज हो जाए तो गॉलब्लेडर स्टोन हो सकता है.
गॉल ब्लेडर में स्टोन होने के कुछ प्रमुख कारण
Liver की बीमारी या लीवर सिरोसिस होने पर गॉल स्टोन होने की संभावना हो सकती है.
अगर बोन मैरो ट्रांसप्लांट हुआ हो तो भी आपको इसका रिस्क हो सकता है.
डायबिटीज में भी इसके होने की संभावना रहती है.
यह अधिकतर 40 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को होता है.
अगर अचानक आपका वजन घट रहा हो तो गॉल स्टोन होने संभावना हो सकती है.
मोटापा में या फिर ज्यादा मात्रा में कोलेस्ट्रॉल के सेवन से भी इसके होने की संभावना रहती है.
गॉल ब्लेडर स्टोन होने के लक्षण
चक्कर आना, बुखार आना, पेट में दर्द होना, एसिडिटी होना, उल्टियां होना एवं गॉल ब्लेडर में जलन महसूस होना इसके मुख्य लक्षण है.
गॉल ब्लेडर स्टोन होने पर इसका समाधान क्या है ?
1. अगर इसका इलाज नहीं कराया जाए तो मरीज को बार-बार दर्द उठ सकती है और जिसका स्टोन काफी बढ़ गया हो, फिर भी उसे नहीं निकाला जाय तो कैंसर भी हो सकती है. यहाँ तक कि गॉल ब्लेडर फट भी सकती है। जो बाद में ब्लड में फैल जाएगी और पैशेंट की स्थिति सीरियस हो जाएगी।
2. जिन्हें गॉल ब्लेडर स्टोन की समस्या है उन्हें ऑपरेशन के द्वारा गॉल ब्लेडर निकलवा लेना चाहिए। क्योंकि गॉल ब्लेडर में स्टोन तभी होता है, जब वो ठीक से काम न कर रहा हो यानि गॉल ब्लेडर खराब हो गया हो। इसलिए इसमें सिर्फ स्टोन ही नहीं बल्कि गॉल ब्लेडर भी निकाल दिया जाता है।
3. गॉल ब्लेडर होने के बाद भी वहाँ एक कॉमन बाइल डक्ट मौजूद होता है जो ब्लेडर के फंक्शन को कंट्रोल कर लेती है। इसलिए गॉल ब्लेडर निकालने पर भी इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है।
Image source : yashodahospitals.com
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